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क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग क्या है? स्पॉट से फर्क, लीवरेज और मार्जिन
प्रॉप ट्रेडिंग 10 मिनट में पढ़ें

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क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग क्या है? स्पॉट से फर्क, लीवरेज और मार्जिन

$2,000 की पोज़िशन पर 3% की चाल $60 ही रहती है, चाहे 2x हो या 20x। फ्यूचर्स की यही बुनियादी बात सबसे ज़्यादा गलत...

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बेसिक्स · परपेचुअल फ्यूचर्स

Nifty के F&O से आए हों या अब तक सिर्फ स्पॉट में कॉइन खरीदते रहे हों, फ्यूचर्स देखकर पहला सवाल यही उठता है: जब कॉइन मेरे पास आता ही नहीं, तो प्रॉफिट बनता कैसे है? क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग क्या है, परपेचुअल में एक्सपायरी क्यों नहीं होती, और लीवरेज व मार्जिन असल में करते क्या हैं — यह सब डॉलर वाले सीधे उदाहरणों से समझते हैं।

क्रिप्टो फ्यूचर्स ट्रेडिंग क्या है और स्पॉट से कैसे अलग है?

स्पॉट में आप कॉइन खरीदते हैं। $1,000 का BTC लिया तो वह आपके वॉलेट में है; दाम 10% बढ़ा तो $100 का फायदा, और जब तक बेचें नहीं, कॉइन आपका। कमाई का रास्ता भी एक ही है: सस्ते में खरीदो, महँगे में बेचो।

फ्यूचर्स में आप कॉइन नहीं, उसकी कीमत पर बना एक कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड करते हैं। BTC आपके वॉलेट में कभी नहीं आता; अकाउंट में बस प्रॉफिट या लॉस का हिसाब USDT में जुड़ता-घटता रहता है। इसी वजह से यहाँ दाम गिरने पर भी कमाया जा सकता है — और उतनी ही जल्दी गँवाया भी।

शेयर बाज़ार में F&O कर चुके हैं तो आधी बात पहले से पता है। फर्क यह है कि वहाँ फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट हर महीने एक्सपायर होता है और तय लॉट साइज़ में ही चलता है। क्रिप्टो में सबसे ज़्यादा ट्रेड होने वाला कॉन्ट्रैक्ट परपेचुअल है: न एक्सपायरी, न लॉट का झंझट, बस एक छोटा सा मिनिमम साइज़।

स्पॉट और परपेचुअल फ्यूचर्स की दो कॉलम वाली तुलना: कॉइन की मालिकी, लॉन्ग-शॉर्ट, मार्जिन-लीवरेज और एक्सपायरी का फर्क
स्पॉट में आप कॉइन के मालिक हैं; फ्यूचर्स में सिर्फ उसकी कीमत के उतार-चढ़ाव के।

परपेचुअल फ्यूचर्स: जिसकी कोई एक्सपायरी नहीं

आम फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट एक तय तारीख पर खत्म होता है, और उस दिन उसका दाम स्पॉट के बराबर आ जाता है। परपेचुअल में ऐसी कोई तारीख नहीं है। पोज़िशन तब तक खुली रह सकती है जब तक आप खुद बंद न करें, या मार्जिन खत्म होने पर सिस्टम बंद न कर दे।

तो बिना एक्सपायरी के परपेचुअल का दाम स्पॉट से दूर क्यों नहीं भाग जाता? इसका इंतज़ाम है फंडिंग रेट। परपेचुअल स्पॉट से ऊपर चले तो लॉन्ग वाले शॉर्ट वालों को एक छोटी रकम देते हैं, नीचे चले तो उल्टा। बड़े एक्सचेंज पर यह हिसाब आमतौर पर हर 8 घंटे होता है, कुछ पेयर पर इससे जल्दी भी।

इंट्राडे ट्रेडर के लिए फंडिंग छोटी बात है। पर जो कई दिन तक पोज़िशन पकड़कर बैठता है, उसके लिए यह चुपचाप बढ़ती लागत बन सकती है, इसलिए लंबी होल्डिंग के हिसाब में इसे भी जोड़िए।

लॉन्ग और शॉर्ट: गिरते बाज़ार में भी ट्रेड

लॉन्ग का मतलब है दाम बढ़ने पर दांव, शॉर्ट का मतलब दाम गिरने पर। स्पॉट में शॉर्ट करने के लिए कॉइन उधार लेकर बेचना पड़ता, जबकि फ्यूचर्स में यह बस एक बटन का काम है।

मान लीजिए ETH पर आपकी $3,000 की शॉर्ट पोज़िशन है और दाम 4% गिर जाता है। प्रॉफिट होगा $120। यही ETH 4% चढ़ जाए तो $120 का लॉस। हिसाब हर बार एक ही है: प्रॉफिट या लॉस = पोज़िशन साइज़ × दाम में बदलाव का प्रतिशत।

शॉर्ट की आज़ादी का एक उल्टा पहलू भी है। स्पॉट में दाम गिरने पर आप “लंबे समय के लिए होल्ड” कहकर बैठ सकते थे। फ्यूचर्स में गलत दिशा की पोज़िशन हर पल इक्विटी घटाती रहती है, इसलिए यहाँ स्टॉप लॉस लगाने की आदत पहले दिन से डालिए।

लीवरेज और मार्जिन: पोज़िशन बड़ी, रकम कम

फ्यूचर्स में पूरी पोज़िशन की कीमत नहीं चुकानी पड़ती। पोज़िशन की ज़मानत के तौर पर आप एक हिस्सा अलग रखते हैं, जिसे मार्जिन कहते हैं, और लीवरेज बताता है कि उस मार्जिन पर कितनी बड़ी पोज़िशन खुलेगी। 5x पर $2,000 की पोज़िशन के लिए $400 का मार्जिन काफी है, 10x पर सिर्फ $200।

सबसे बड़ी गलतफहमी यहीं होती है। ज़्यादातर नए ट्रेडर मानते हैं कि लीवरेज बढ़ाया तो रिस्क बढ़ा। असल में प्रॉफिट-लॉस पोज़िशन साइज़ से तय होता है, लीवरेज से नहीं: $2,000 की पोज़िशन पर 3% मूव का मतलब $60 है, चाहे 2x हो या 20x।

लीवरेज बस दो चीज़ें बदलता है: कितना मार्जिन लॉक होगा, और लिक्विडेशन प्राइस कितना पास आएगा। रिस्क असल में तब बढ़ता है जब कम मार्जिन देखकर आप पोज़िशन ही बड़ी कर लेते हैं। लिक्विडेशन का पूरा गणित लिक्विडेशन प्राइस कैसे पास आता है वाले आर्टिकल में है।

डॉलर में एक पूरा उदाहरण

मान लीजिए $10,000 के अकाउंट से आप BTC/USDT पर $2,000 का लॉन्ग लेते हैं, 5x लीवरेज पर। मार्जिन लगा $400, बाकी $9,600 फ्री रहता है।

  • BTC 3% चढ़ा: +$60, अकाउंट $10,060 पर, यानी +0.6%।
  • BTC 3% गिरा: −$60, अकाउंट $9,940 पर, यानी −0.6%।
  • यही ट्रेड स्पॉट में $2,000 का BTC खरीदकर करते, तब भी नतीजा ±$60 ही रहता — बस पूरे $2,000 उसमें फँसे रहते।

अब वही सेटअप, पर जोश में पोज़िशन $20,000 की और लीवरेज 10x। मार्जिन फिर भी $2,000 ही लगा, जो सुनने में ठीक लगता है। लेकिन अब 3% की गिरावट का मतलब है $600 का लॉस, पूरे अकाउंट का 6%, और वह भी एक ही कैंडल में हो सकता है।

$10,000 अकाउंट पर BTC के $2,000 वाले 5x लॉन्ग का हिसाब: मार्जिन $400, 3% मूव पर ±$60, और $20,000 की पोज़िशन पर ±$600
लीवरेज से सिर्फ मार्जिन बदला; लॉस पोज़िशन साइज़ के साथ दस गुना हुआ।

मार्क प्राइस और लास्ट प्राइस: चार्ट वाला दाम ही सब कुछ नहीं

फ्यूचर्स स्क्रीन पर दो दाम दिखते हैं। लास्ट प्राइस वह है जिस पर आखिरी सौदा हुआ, और चार्ट की कैंडल इसी से बनती हैं। मार्क प्राइस एक “फेयर” दाम है, जो कई स्पॉट एक्सचेंज के इंडेक्स प्राइस और फंडिंग को मिलाकर निकाला जाता है।

दोनों का काम अलग है। ज़्यादातर बड़े एक्सचेंज अनरियलाइज़्ड PnL और लिक्विडेशन के लिए मार्क प्राइस लेते हैं, ताकि किसी एक एक्सचेंज पर आई अचानक विक से लोग बेवजह लिक्विडेट न हों। आम दिनों में दोनों दाम थोड़े से फर्क पर साथ-साथ चलते हैं।

फर्क तेज़ झटकों में दिखता है। कई बार चार्ट की विक लिक्विडेशन प्राइस छूकर लौट जाती है और पोज़िशन बच जाती है, क्योंकि मार्क प्राइस वहाँ तक पहुँचा ही नहीं। उल्टा भी होता है: जिन प्लेटफॉर्म पर स्टॉप लास्ट प्राइस से ट्रिगर होता है, वहाँ वही विक आपका स्टॉप ले जाती है। इसलिए स्टॉप ठीक किसी गोल नंबर या पिछली विक के सिरे पर मत रखिए, थोड़ा आगे रखिए।

Fundex24 पर कीमतें और चार्ट Binance Futures के मार्केट प्राइस के हिसाब से चलते हैं; किसी कैंडल पर शक हो तो वहाँ का चार्ट खोलकर मिलान कर लीजिए।

प्रॉप चैलेंज फ्यूचर्स-स्टाइल पोज़िशन पर क्यों चलता है

Fundex24 पर आप BTC/USDT, ETH/USDT जैसे पेयर पर परपेचुअल फ्यूचर्स जैसी पोज़िशन लेते हैं, लॉन्ग या शॉर्ट। पहली वजह सीधी है: प्रॉप अकाउंट का बैलेंस USDT में होता है, और फ्यूचर्स में हर ट्रेड का नतीजा उसी बैलेंस में प्रॉफिट या लॉस बनकर जुड़ता है। कॉइन खरीदने, संभालने या वॉलेट में रखने का कोई सवाल ही नहीं।

दूसरी वजह है दोनों दिशा में मौका। क्रिप्टो हफ्तों तक गिरता या साइडवेज़ भी रह सकता है, और सिर्फ स्पॉट वाला ट्रेडर उस दौरान हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता। फ्यूचर्स में गिरते बाज़ार में शॉर्ट लेकर भी टारगेट की तरफ बढ़ा जा सकता है। एक ही पेयर पर लॉन्ग और शॉर्ट दोनों रखना (हेजिंग) भी चलता है, बस दोनों के बीच कम से कम 15 मिनट का फासला हो।

तीसरी वजह है रिस्क को नापना। Fundex24 पर सिर्फ आइसोलेटेड मार्जिन चलता है, क्रॉस मार्जिन की इजाज़त नहीं, यानी हर पोज़िशन का मार्जिन अलग रहता है। ऊपर से डेली ड्रॉडाउन (दिन के शुरुआती बैलेंस का 5%) और मैक्सिमम ड्रॉडाउन (शुरुआती बैलेंस का 10%) की लाइनें हैं, और इन पर बैलेंस के साथ इक्विटी भी देखी जाती है।

अब ऊपर वाला $20,000 का ट्रेड याद कीजिए। $10,000 के अकाउंट पर डेली लिमिट $500 है, तो 3% की उल्टी चाल का $600 वाला फ्लोटिंग लॉस यह लाइन पार कर देगा, भले ही दाम बाद में लौट आए। पूरी डिटेल Fundex24 के ट्रेडिंग नियम पेज पर है, और चैलेंज का पूरा ढाँचा क्रिप्टो प्रॉप ट्रेडिंग की पूरी गाइड में।

बड़ी पोज़िशन चैलेंज में दूसरी तरफ से भी चोट करती है। अगर एक ही पोज़िशन स्टेज के प्रॉफिट टारगेट के 60% से ज़्यादा कमा दे, तो वह हाई रिस्क ट्रेड माना जाता है और उसका प्रॉफिट गिना नहीं जाता; $10,000 के स्टेज 1 में यह सीमा $600 है।

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कौन-सा साइज़ सही रहेगा, तय नहीं कर पा रहे? नियम पढ़ें · आम सवाल

शुरुआत: पहले प्रैक्टिस अकाउंट पर हाथ साफ करें

फ्यूचर्स की असली समझ ऑर्डर लगाकर ही आती है, पर इसके लिए पहले दिन पैसा या चैलेंज फीस दांव पर लगाना ज़रूरी नहीं। Fundex24 का फ्री प्रैक्टिस अकाउंट $10,000 के वर्चुअल बैलेंस और 1:10 तक के लीवरेज के साथ आता है, और फिलहाल 3 दिन चलता है।

इन 3 दिनों में तीन काम कीजिए। हर ट्रेड से पहले पोज़िशन साइज़ और मार्जिन कागज़ पर निकालिए। कम से कम एक लॉन्ग और एक शॉर्ट लेकर देखिए कि PnL किस तरह बदलता है। और हर बार देखिए कि लिक्विडेशन प्राइस आपके स्टॉप लॉस से कितना दूर है। इसके लिए फ्री प्रैक्टिस अकाउंट बनाइए

एक आखिरी बात: लीवरेज की वजह से फ्यूचर्स में नुकसान बहुत तेज़ी से होता है। ऊपर के सारे आंकड़े सिर्फ समझाने के लिए हैं, किसी कमाई का वादा नहीं।

क्रिप्टो फ्यूचर्स पर आम सवाल

क्या फ्यूचर्स में कॉइन मेरे वॉलेट में आता है?

नहीं, आपके पास सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट होता है और प्रॉफिट या लॉस USDT में सेटल होता है। कॉइन अपने पास रखना हो तो उसके लिए स्पॉट ही रास्ता है।

कितना लीवरेज लेना ठीक रहता है?

कोई जादुई नंबर नहीं है। पहले तय कीजिए कि एक ट्रेड पर अकाउंट का कितना प्रतिशत रिस्क करेंगे और स्टॉप कहाँ लगेगा; उसी से पोज़िशन साइज़ निकलता है। लीवरेज बस इतना रखिए कि लिक्विडेशन प्राइस स्टॉप से काफी दूर रहे, और ज़्यादातर मामलों में कम लीवरेज ही समझदारी है।

शॉर्ट में नुकसान असीमित क्यों कहा जाता है?

क्योंकि दाम के ऊपर जाने की कोई सीमा नहीं होती। आइसोलेटेड मार्जिन में उस पोज़िशन का नुकसान उसके मार्जिन तक रुकता है, पर प्रॉप अकाउंट में उससे काफी पहले ड्रॉडाउन लिमिट आ जाती है। इसलिए असली बचाव स्टॉप लॉस है।

क्रिप्टो परपेचुअल और Nifty फ्यूचर्स में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

एक्सपायरी और बाज़ार के घंटे। Nifty फ्यूचर्स का हर कॉन्ट्रैक्ट महीने के आखिर में खत्म होता है और सिर्फ मार्केट टाइम में ट्रेड होता है, जबकि क्रिप्टो परपेचुअल की कोई एक्सपायरी नहीं और बाज़ार 24/7 खुला रहता है।

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